“8वें वेतन आयोग की सिफारिशें केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों तक सीमित हैं, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों का वेतन द्विपक्षीय समझौतों से तय होता है। हड़ताल के दौरान ‘नो वर्क, नो पे’ सिद्धांत लागू होता है, जिससे सैलरी कटौती और वृद्धि में देरी संभव है। नियमों के अनुसार, अवैध हड़ताल पर दंडनीय कार्रवाई हो सकती है, लेकिन बैंक कर्मचारियों को 12वें द्विपक्षीय समझौते के तहत 2027 तक वेतन संरचना बनी रहेगी।”
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारी, जैसे SBI, PNB और Bank of Baroda के स्टाफ, अक्सर वेतन संशोधन और कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर हड़ताल का सहारा लेते हैं। हाल ही में, United Forum of Bank Unions ने 5-दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया, जिससे लाखों ग्राहकों को असुविधा हुई। लेकिन 8वें वेतन आयोग के तहत इन कर्मचारियों की सैलरी में कोई वृद्धि नहीं होगी, क्योंकि यह आयोग केवल केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों पर लागू होता है। बैंक कर्मचारियों का वेतन Indian Banks’ Association (IBA) और यूनियनों के बीच द्विपक्षीय समझौतों से तय होता है, जो हर 5 वर्ष में नवीनीकृत होता है।
वर्तमान में, 12वां द्विपक्षीय समझौता नवंबर 2022 से प्रभावी है, जो मार्च 2027 तक चलेगा। इस समझौते के तहत, बैंक कर्मचारियों को 17% की औसत वेतन वृद्धि मिली, जिसमें बेसिक पे, DA और HRA शामिल हैं। उदाहरण के लिए, एक क्लर्क की न्यूनतम बेसिक सैलरी 17,900 रुपये से बढ़कर लगभग 20,900 रुपये हो गई, जबकि अधिकारी स्तर पर यह 36,000 से 89,000 रुपये तक की रेंज में है। लेकिन हड़ताल करने वाले कर्मचारियों के लिए नियम सख्त हैं। Payment of Wages Act, 1936 की धारा 7(2)(b) के अनुसार, ड्यूटी से अनुपस्थिति पर वेतन कटौती अनिवार्य है, भले ही हड़ताल वैध हो। Supreme Court के फैसले Bank of India vs. T.S. Kelawala (1990) में स्पष्ट किया गया कि ‘नो वर्क, नो पे’ सिद्धांत लागू होता है, और नियोक्ता बिना जांच के वेतन कटौती कर सकता है।
यदि हड़ताल अवैध मानी जाती है, तो Union Bank of India Officer Employees’ (Discipline and Appeal) Regulations, 1976 जैसे सेवा नियमों के तहत दंड लग सकता है, जिसमें इंक्रीमेंट रोकना, प्रमोशन में देरी या रिकवरी शामिल है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 में हुई बैंक हड़ताल में लगभग 10 लाख कर्मचारियों ने भाग लिया, जिससे बैंकों को 500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। इस दौरान, हड़ताल अवधि के लिए औसतन 1,000 से 5,000 रुपये प्रति कर्मचारी की सैलरी कटौती हुई। केंद्रीय कर्मचारियों की तरह, जहां 8वें वेतन आयोग से 30-34% वृद्धि की उम्मीद है (फिटमेंट फैक्टर 1.83 से 2.46 तक), बैंक कर्मचारियों को ऐसी कोई सुविधा नहीं मिलेगी।
प्रमुख नियम और प्रभाव
वेतन कटौती का आधार : Industrial Disputes Act, 1947 की धारा 2(q) हड़ताल को परिभाषित करती है, लेकिन Wages Act हड़ताल अवधि को ‘अनुपस्थिति’ मानता है। वैध हड़ताल में भी वेतन नहीं मिलता, जबकि अवैध में अतिरिक्त दंड।
द्विपक्षीय समझौते का महत्व : 12वें समझौते में DA को AICPI से लिंक किया गया, जो वर्तमान में 47% है। हड़ताल से समझौते की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जैसा कि 11वें समझौते में हुआ जब हड़ताल के बाद वृद्धि 15% तक सीमित रही।
दंडनीय कार्रवाई : PSU बैंक नियमों में ‘मिसकंडक्ट’ के तहत हड़ताल को शामिल किया जाता है। यदि हड़ताल बिना नोटिस के हो, तो रूल 4 के तहत माइनर पेनल्टी जैसे सेंशर या इंक्रीमेंट रोकना संभव।
आर्थिक प्रभाव : ICRA रिपोर्ट के अनुसार, 8वें वेतन आयोग से सरकारी खर्च FY2028 में 1 लाख करोड़ रुपये बढ़ सकता है, लेकिन बैंक सेक्टर पर इसका कोई असर नहीं, क्योंकि उनका बजट अलग है। हड़ताल से बैंक कर्मचारियों की औसत मासिक हानि 10,000 रुपये तक हो सकती है।
वेतन संरचना की तुलना (केंद्रीय कर्मचारी vs बैंक कर्मचारी)
| पैरामीटर | केंद्रीय सरकारी कर्मचारी (8वां वेतन आयोग) | सार्वजनिक क्षेत्र बैंक कर्मचारी (12वां द्विपक्षीय समझौता) |
|---|---|---|
| लागू तिथि | 1 जनवरी 2026 से (सिफारिशें लंबित) | नवंबर 2022 से मार्च 2027 तक |
| वृद्धि दर | 30-34% (फिटमेंट फैक्टर 2.46 तक) | 17% औसत (DA सहित) |
| न्यूनतम बेसिक पे | 26,000 रुपये (अनुमानित) | क्लर्क: 20,900 रुपये; अधिकारी: 36,000 रुपये |
| DA गणना | CPI-IW पर आधारित, अर्धवार्षिक | AICPI पर, तिमाही |
| हड़ताल प्रभाव | अवैध हड़ताल पर Conduct Rules के तहत दंड, लेकिन आयोग लाभ प्रभावित नहीं | ‘नो वर्क, नो पे’; अवैध पर Discipline Regulations के तहत इंक्रीमेंट रोक |
| पेंशन | NPS या OPS विकल्प, 8वें आयोग से संशोधन | NPS, लेकिन द्विपक्षीय से तय |
हड़ताल के दौरान, यदि कर्मचारी ‘स्टे-इन स्ट्राइक’ करते हैं (परिसर में रहकर काम न करना), तो भी Wages Act की व्याख्या II के अनुसार अनुपस्थिति मानी जाती है। Confederation of Central Government Employees की तरह, बैंक यूनियन भी मांगें उठा रही हैं, लेकिन 8वें आयोग की देरी से केंद्रीय कर्मचारियों ने 12 फरवरी 2026 को हड़ताल की धमकी दी है। बैंक सेक्टर में, AIBOC और UFBU ने 5-दिवसीय सप्ताह के लिए दबाव बनाया, जिससे RBI ने विचार किया लेकिन अभी कोई फैसला नहीं। यदि हड़ताल लंबी चली, तो कर्मचारियों की वार्षिक इंक्रीमेंट प्रभावित हो सकती है, क्योंकि सेवा नियमों में 180 दिनों की न्यूनतम उपस्थिति जरूरी है।
ऐसे मामलों में, कर्मचारी यूनियन कोर्ट जा सकते हैं, जैसा कि Kerala High Court के एक फैसले में जहां अनिवार्य लीव पर कटौती रोकी गई, लेकिन सामान्य हड़ताल पर यह लागू नहीं। कुल मिलाकर, बैंक कर्मचारियों को 8वें वेतन आयोग से कोई लाभ नहीं, और हड़ताल से केवल नुकसान। यदि अगला द्विपक्षीय समझौता 2027 में होता है, तो उसमें 20% वृद्धि की संभावना है, लेकिन हड़ताल से谈判 प्रभावित हो सकती है।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट उपलब्ध सूत्रों और जानकारी पर आधारित है।





