“Paytm के शेयरों में हालिया कारोबार के दौरान लगभग 10% की गिरावट आई, मुख्य रूप से Payment Infrastructure Development Fund (PIDF) योजना की अवधि समाप्ति की अटकलों से; निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी क्योंकि RBI द्वारा इसे आगे न बढ़ाने की आशंका से बाजार प्रभावित हुआ, कंपनी ने स्पष्टीकरण जारी किया लेकिन शेयर तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंचे।”
Paytm की पैरेंट कंपनी One97 Communications के शेयरों में शुरुआती कारोबार के दौरान तेज गिरावट दर्ज की गई, जहां स्टॉक 10% तक नीचे आया। यह गिरावट Payment Infrastructure Development Fund (PIDF) योजना से जुड़ी बाजार की चिंताओं से जुड़ी है, जो डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए RBI द्वारा शुरू की गई थी। योजना की मौजूदा अवधि दिसंबर 2025 में समाप्त हो रही है, और बाजार में यह अटकलें तेज हैं कि RBI इसे आगे नहीं बढ़ाएगा, जिससे पेमेंट कंपनियों पर सब्सिडी का असर पड़ सकता है।
इस गिरावट से शेयर तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया, जो अक्टूबर 2025 के बाद का सबसे कम मूल्य है। ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी भारी उछाल देखा गया, जहां लगभग 193 लाख शेयरों का कारोबार हुआ, जो सामान्य से दोगुना से अधिक है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि PIDF की अनुपस्थिति से Paytm जैसे प्लेटफॉर्म्स पर मर्चेंट एक्विजिशन लागत बढ़ सकती है, खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों में जहां डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी महत्वपूर्ण है।
कंपनी ने इन अटकलों पर स्पष्टीकरण जारी किया, जिसमें कहा गया कि PIDF योजना का उनके कारोबार पर सीमित प्रभाव है और वे वैकल्पिक रणनीतियों पर काम कर रहे हैं। हालांकि, निवेशकों में चिंता बनी हुई है क्योंकि Paytm पहले से ही रेगुलेटरी चुनौतियों का सामना कर रहा है, जैसे कि पिछले साल की RBI जांचों से जुड़े मुद्दे। बाजार में put option ट्रेडिंग में बढ़ोतरी देखी गई, जो बेयरिश सेंटिमेंट को दर्शाती है, जहां 27 जनवरी की एक्सपायरी से पहले भारी put खरीदारी हुई।
एनालिस्ट्स के अनुसार, Paytm का शेयर प्राइस अब शॉर्ट-टर्म और मीडियम-टर्म EMA से नीचे ट्रेड कर रहा है, जो आगे की कमजोरी का संकेत देता है। Bonanza के तकनीकी एनालिस्ट ने कहा कि स्टॉक में ब्रेकडाउन हुआ है, और अगर PIDF पर कोई सकारात्मक अपडेट नहीं आया तो 1,100 रुपये का स्तर टूट सकता है। वहीं, Investec ने लॉन्ग-टर्म संभावनाओं पर Buy रेटिंग दी है, लेकिन निकट भविष्य में सतर्कता की सलाह दी।
Paytm के Q3 FY26 रिजल्ट्स 29 जनवरी को आने वाले हैं, और कंपनी की अर्निंग्स कॉल 30 जनवरी को होगी, जहां PIDF और अन्य रेगुलेटरी मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद है। बाजार में यह उम्मीद है कि अगर कंपनी मजबूत ग्रोथ मेट्रिक्स दिखाती है, जैसे कि UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में बढ़ोतरी या लेंडिंग सेगमेंट में सुधार, तो रिकवरी हो सकती है। वर्तमान में, Paytm का मार्केट कैप लगभग 73,000 करोड़ रुपये है, जो पिछले साल के पीक से 25% कम है।
शेयर गिरावट के प्रमुख कारण
PIDF योजना की अनिश्चितता : यह योजना POS टर्मिनल्स और QR कोड्स पर सब्सिडी प्रदान करती है, जिसकी समाप्ति से Paytm की मर्चेंट एक्विजिशन स्ट्रैटेजी प्रभावित हो सकती है। बाजार रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर योजना नहीं बढ़ी तो इंडस्ट्री-वाइड लागत 15-20% बढ़ सकती है।
रेगुलेटरी प्रेशर : RBI की सख्त नीतियां, जैसे कि डेटा लोकलाइजेशन और KYC कंप्लायंस, Paytm के ऑपरेशंस पर दबाव डाल रही हैं। हालिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि कंपनी को कुछ क्षेत्रों में फाइन भी लग सकता है।
बाजार सेंटिमेंट : व्यापक बाजार में टेक स्टॉक्स पर दबाव है, जहां Nifty IT इंडेक्स भी 2% नीचे है। Paytm के मामले में, यह गिरावट चार में से पांच सेशन्स में जारी रही, जिससे कुल साप्ताहिक नुकसान 12% पहुंच गया।
ट्रेडिंग पैटर्न : इंट्रा-डे हाई से 13% की गिरावट देखी गई, जो हाई वॉल्यूम पर हुई, इंगित करता है कि बड़े निवेशकों ने पोजीशंस काटीं।
निवेशकों की चिंताएं और प्रभाव
निवेशकों में मुख्य चिंता प्रॉफिटेबिलिटी पर है, क्योंकि Paytm अभी भी लॉस-मेकिंग स्टेज में है, हालांकि हाल के क्वार्टर्स में नुकसान कम हुआ है। अगर PIDF समाप्त हुई तो कंपनी की EBITDA मार्जिन पर 5-7% का नेगेटिव इंपैक्ट पड़ सकता है, जो वर्तमान में 12% के आसपास है। इसके अलावा, कॉम्पिटिशन बढ़ रहा है, जहां Google Pay और PhonePe जैसे प्लेयर्स मार्केट शेयर बढ़ा रहे हैं।
एक सर्वे में, 60% रिटेल निवेशकों ने कहा कि वे PIDF पर RBI के फैसले का इंतजार कर रहे हैं, जो अगले महीने आ सकता है। संस्थागत निवेशकों में FIIs ने हाल में अपनी होल्डिंग्स 2% घटाईं, जो अनिश्चितता को दर्शाता है। हालांकि, कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि अगर कंपनी अपनी लेंडिंग और इंश्योरेंस सर्विसेज को मजबूत करती है, तो लॉन्ग-टर्म में रिकवरी संभव है।
कंपनी की प्रतिक्रिया और आगे की रणनीति
Paytm ने स्टॉक एक्सचेंज को भेजे स्पष्टीकरण में कहा कि PIDF का उनके कुल रेवेन्यू पर सिर्फ 3-5% प्रभाव है, और वे सेल्फ-फंडेड एक्सपैंशन पर फोकस कर रहे हैं। कंपनी ग्रामीण भारत में ऑफलाइन पेमेंट्स को बढ़ाने के लिए नए पार्टनरशिप्स कर रही है, जैसे कि छोटे दुकानदारों के लिए सस्ते POS डिवाइसेज। इसके अलावा, UPI इंटीग्रेशन को मजबूत करने के लिए AI-बेस्ड फ्रॉड डिटेक्शन टूल्स लॉन्च किए जा रहे हैं।
शेयर प्रदर्शन का तुलनात्मक विश्लेषण
| पैरामीटर | वर्तमान मूल्य (₹) | साप्ताहिक बदलाव (%) | मासिक बदलाव (%) | वार्षिक बदलाव (%) |
|---|---|---|---|---|
| Paytm | 1,155 | -12 | -18 | +15 |
| PhonePe (निजी) | N/A | N/A | N/A | N/A |
| Google Pay (निजी) | N/A | N/A | N/A | N/A |
| Nifty IT इंडेक्स | 42,500 | -2 | -5 | +22 |
यह तालिका दर्शाती है कि Paytm का प्रदर्शन व्यापक IT सेक्टर से कमजोर रहा है, मुख्य रूप से कंपनी-विशिष्ट मुद्दों से।
एनालिस्ट रेटिंग्स और टारगेट प्राइस
Investec : Buy, टारगेट ₹1,500 – लॉन्ग-टर्म ग्रोथ पर फोकस।
Bonanza : Sell, टारगेट ₹1,000 – तकनीकी ब्रेकडाउन के आधार पर।
Motilal Oswal : Neutral, टारगेट ₹1,200 – PIDF अपडेट का इंतजार।
Equentis : Hold, क्योंकि रेगुलेटरी क्लैरिटी के बाद रिकवरी संभव।
ये रेटिंग्स दर्शाती हैं कि बाजार में मिश्रित सेंटिमेंट है, जहां शॉर्ट-टर्म रिस्क हाई है लेकिन फंडामेंटल्स मजबूत हैं। निवेशकों को Q3 रिजल्ट्स पर नजर रखनी चाहिए, जहां रेवेन्यू ग्रोथ 20% से ऊपर रहने की उम्मीद है।
बाजार प्रभाव और इंडस्ट्री इंप्लिकेशंस
यह गिरावट सिर्फ Paytm तक सीमित नहीं है; अन्य फिनटेक स्टॉक्स जैसे कि PolicyBazaar और Zomato में भी 2-3% की कमजोरी देखी गई। अगर PIDF नहीं बढ़ी तो पूरे डिजिटल पेमेंट सेक्टर पर असर पड़ेगा, जहां मर्चेंट ऑनबोर्डिंग धीमी हो सकती है। RBI की नीतियां अब अधिक सस्टेनेबल ग्रोथ पर फोकस कर रही हैं, जो सब्सिडी-डिपेंडेंट मॉडल्स को चुनौती देगी। Paytm के लिए, यह मौका है कि वे इनोवेशन के जरिए बाजार हिस्सेदारी बनाए रखें, जैसे कि इंटरनेशनल एक्सपैंशन या ब्लॉकचेन-बेस्ड सॉल्यूशंस।
Disclaimer: This is based on available news reports and market analysis. It is not investment advice; consult professional financial advisors for tips. Sources are from public domain market data.





