India US Trade Deal: दाल-दूध से लेकर लैपटॉप तक… ट्रेड डील से क्या सस्ता, क्या महंगा होगा; देखें पूरी लिस्ट.

By Ashish Pandey

Published on:

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का प्रभाव दिखाती छवि जिसमें दाल, दूध, लैपटॉप और अन्य उत्पाद शामिल हैं।
WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

“भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया है, जबकि भारत ने अमेरिकी तेल, कृषि उत्पादों और तकनीकी सामानों की खरीद बढ़ाने का वादा किया है। इससे दाल, प्रोसेस्ड फूड, लैपटॉप जैसे आयातित उत्पाद सस्ते हो सकते हैं, लेकिन रूसी तेल की खरीद बंद होने से पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। समझौते से उपभोक्ता सामानों की कीमतों में बदलाव आएगा, जिसमें कृषि, इलेक्ट्रॉनिक्स और कंज्यूमर गुड्स शामिल हैं।”

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के पहले चरण में अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा फायदा मिलेगा। इसके बदले भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद करने और अमेरिकी ऊर्जा, कृषि, तकनीकी और रक्षा उत्पादों की खरीद बढ़ाने पर सहमति जताई है। यह समझौता भारतीय बाजार में आयातित सामानों की कीमतों को प्रभावित करेगा, जहां कुछ उत्पादों पर कम टैरिफ से कीमतें गिरेंगी, जबकि ऊर्जा शिफ्ट से कुछ महंगे हो सकते हैं। समझौते के तहत भारत अमेरिकी सामानों पर औद्योगिक टैरिफ को 13.5% से घटाकर 0% करेगा, जो इंपोर्ट को आसान बनाएगा।

सस्ते होने वाले उत्पाद: मुख्य श्रेणियां और प्रभाव

समझौते से अमेरिकी आयात पर टैरिफ कम होने से कई रोजमर्रा के उत्पाद सस्ते हो जाएंगे। अमेरिकी कृषि उत्पादों को सीमित बाजार पहुंच मिलेगी, लेकिन संवेदनशील क्षेत्र जैसे डेयरी और कृषि को सुरक्षा दी गई है। फिर भी, प्रोसेस्ड फूड और कुछ कृषि आयात सस्ते होंगे। इलेक्ट्रॉनिक्स और कंज्यूमर गुड्स में बड़ा बदलाव आएगा, जहां टैरिफ रिडक्शन से रिटेल प्राइस 10-20% तक गिर सकती है। यहां मुख्य श्रेणियां:

See also  2026 में स्पेशल सिचुएशन निवेश: इन 7 तरीकों से उठाएं फायदा, आपका पोर्टफोलियो बदल सकता है!

कृषि और फूड उत्पाद : दाल (pulses) जैसे आयातित lentils और chickpeas अमेरिका से सस्ते आएंगे, क्योंकि टैरिफ रिडक्शन से इंपोर्ट कॉस्ट घटेगी। वर्तमान में दाल की औसत कीमत 80-120 रुपये प्रति किलो है, जो 10-15% कम हो सकती है। प्रोसेस्ड फूड जैसे पैकेज्ड snacks, cereals और frozen foods में 5-10% कीमत गिरावट संभव, क्योंकि अमेरिकी ब्रांड्स जैसे Kellogg’s या General Mills के उत्पाद आसानी से उपलब्ध होंगे।

डेयरी उत्पाद : दूध और डेयरी आयात पर सीमित रियायत मिली है, लेकिन प्रोसेस्ड डेयरी जैसे cheese, yogurt और milk powder सस्ते हो सकते हैं। वर्तमान में imported cheese की कीमत 500-800 रुपये प्रति किलो है, जो टैरिफ कट से 15% तक कम हो सकती है। हालांकि, घरेलू किसानों की सुरक्षा के लिए पूर्ण बाजार पहुंच नहीं दी गई।

इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक गुड्स : लैपटॉप, gadgets और electronic components सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। अमेरिकी ब्रांड्स जैसे Apple, Dell या HP के laptops पर टैरिफ 0% होने से कीमतें 10-25% गिर सकती हैं। उदाहरण: एक mid-range laptop की वर्तमान कीमत 50,000-70,000 रुपये है, जो 40,000-60,000 तक आ सकती है। स्मार्टफोन components और accessories भी सस्ते होंगे।

कंज्यूमर और घरेलू सामान : पैकेज्ड गुड्स, household appliances जैसे microwave, blenders और plastics उत्पाद सस्ते होंगे। अमेरिकी ब्रांड्स जैसे Whirlpool या KitchenAid के appliances पर टैरिफ रिडक्शन से 8-12% कीमत कम। Processed foods और packaged goods में विविधता बढ़ेगी, जैसे nuts, fruits और snacks।

नीचे एक टेबल में सस्ते होने वाले प्रमुख उत्पादों की लिस्ट और अनुमानित कीमत प्रभाव:

महंगे होने वाले उत्पाद: चुनौतियां और प्रभाव

उत्पाद श्रेणीप्रमुख उदाहरणवर्तमान औसत कीमत (रुपये)अनुमानित कीमत गिरावट (%)संभावित नई कीमत (रुपये)
दाल (Pulses)Lentils, Chickpeas80-120 प्रति किलो10-1570-105 प्रति किलो
डेयरीCheese, Yogurt500-800 प्रति किलो15425-680 प्रति किलो
लैपटॉपMid-range Dell/HP50,000-70,00010-2540,000-52,500
प्रोसेस्ड फूडCereals, Snacks200-400 प्रति पैक5-10180-360 प्रति पैक
AppliancesMicrowave, Blender5,000-10,0008-124,600-8,800
इलेक्ट्रॉनिक ComponentsGadgets Accessories1,000-5,00010-20800-4,000

समझौते का एक बड़ा हिस्सा रूसी तेल की खरीद बंद करना है, जो सस्ता था। अब अमेरिकी तेल और ऊर्जा उत्पादों की खरीद बढ़ेगी, जो महंगे हो सकते हैं। इससे ईंधन कीमतों में वृद्धि संभव है। साथ ही, कुछ घरेलू उत्पादों पर प्रतिस्पर्धा बढ़ने से अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा। मुख्य प्रभाव:

See also  Motilal Oswal ने बजट सप्ताह के लिए चुना ये ऑटो शेयर, टार्गेट देख ललचा जाएगा मन; इतनी होगी कमाई

ऊर्जा और ईंधन : रूसी तेल बंद होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। वर्तमान में पेट्रोल 95-100 रुपये प्रति लीटर है, जो 5-10% बढ़कर 100-110 हो सकती है। अमेरिकी coal और petroleum आयात महंगे पड़ेंगे, जिससे बिजली और ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बढ़ेगी।

कृषि उत्पाद (सीमित प्रभाव) : हालांकि डेयरी और कृषि संरक्षित हैं, लेकिन अमेरिकी nuts, fruits जैसे almonds या apples की बढ़ती आयात से घरेलू कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। यदि प्रतिस्पर्धा बढ़ी, तो कुछ लोकल उत्पाद महंगे लग सकते हैं।

अन्य कंज्यूमर गुड्स : यदि अमेरिकी pharma और telecom उत्पादों की बाढ़ आई, तो घरेलू ब्रांड्स की कीमतें स्थिर रह सकती हैं, लेकिन आयात निर्भरता से लंबे समय में कॉस्ट बढ़ सकती है।

नीचे महंगे होने वाले उत्पादों की लिस्ट और अनुमानित प्रभाव:

व्यापक आर्थिक प्रभाव और सेक्टर-वाइज विश्लेषण

उत्पाद श्रेणीप्रमुख उदाहरणवर्तमान औसत कीमत (रुपये)अनुमानित कीमत वृद्धि (%)संभावित नई कीमत (रुपये)
ईंधनPetrol/Diesel95-100 प्रति लीटर5-10100-110 प्रति लीटर
ऊर्जा उत्पादElectricity (घरेलू बिल)500-1,000 प्रति माह3-7515-1,070 प्रति माह
Nuts/FruitsAlmonds, Apples (Imported)600-800 प्रति किलो5 (प्रतिस्पर्धा से)630-840 प्रति किलो
ट्रांसपोर्ट कॉस्टBus/Train Fares50-200 प्रति ट्रिप2-551-210 प्रति ट्रिप

यह समझौता भारतीय निर्यात को बढ़ावा देगा, जहां textile, gems और pharma सेक्टर में 15-20% ग्रोथ संभव है। लेकिन उपभोक्ता स्तर पर, सस्ते आयात से inflation कंट्रोल होगा, खासकर food basket में। CII के अनुसार, यह डील GDP को 0.5-1% बूस्ट दे सकती है। हालांकि, oil shift से trade deficit बढ़ सकता है, क्योंकि अमेरिकी तेल रूसी से 10-15% महंगा है।

See also  हुंडई के लिए ₹6.90 लाख की इस CNG कार का चला जादू, 49464 लोगों ने खरीद डाला; ये एक्सитер या i10 नहीं

टेक्सटाइल और गारमेंट्स : अमेरिकी बाजार में आसान पहुंच से भारतीय garments सस्ते होंगे, लेकिन आयातित fabrics से घरेलू कीमतें स्थिर रहेंगी।

फार्मा और हेल्थकेयर : अमेरिकी दवाएं सस्ती होंगी, जैसे cancer medicines पर टैरिफ कट से 10% बचत।

ऑटो और मैन्युफैक्चरिंग : Components सस्ते होने से cars और bikes की कीमतें 5% कम हो सकती हैं।

समझौते के अगले चरण में और डिटेल्स आएंगे, लेकिन फिलहाल उपभोक्ताओं को सस्ते इंपोर्ट का फायदा मिलेगा, जबकि ऊर्जा कॉस्ट पर नजर रखनी होगी।

Disclaimer: यह रिपोर्ट उपलब्ध समाचारों, रिपोर्टों और टिप्स पर आधारित है।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

Ashish Pandey

My name is Ashish Pandey, I work as a content writer and I love to write articles. With 4 years of blogging experience I am always ready to inspire others and share knowledge to make them a successful blogger.

Leave a Comment