रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने जियोब्लैकरॉक इवेंट में साफ कहा कि सोना-चांदी में घरेलू बचत अनुत्पादक है। भारत ने पिछले साल 60 अरब डॉलर का सोना और 10-15 अरब डॉलर चांदी आयात किया, जो औद्योगिक उपयोग के बजाय सिर्फ बचत के रूप में पड़ा रहता है। अंबानी का तर्क है कि कैपिटल मार्केट में निवेश से रिटर्न कंपाउंड होते हैं और देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में असली दौलत बनती है।
मुकेश अंबानी का सीधा संदेश: अनुत्पादक बचत को उत्पादक बनाएं रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने ब्लैकरॉक के सीईओ लैरी फिंक के साथ फायरसाइड चैट में कहा कि भारतीय परिवार दशकों से अनुशासित बचतकर्ता रहे हैं, लेकिन उनकी ज्यादातर बचत सोना-चांदी या अन्य फिजिकल एसेट्स में फंसी रहती है। ये एसेट्स मूल्य तो सुरक्षित रखते हैं, लेकिन नई संपत्ति नहीं पैदा करते। अंबानी ने जोर दिया कि शेयर बाजार में पैसा लगाने से रिटर्न कंपाउंड होते हैं और वे न सिर्फ परिवार की दौलत बढ़ाते हैं, बल्कि देश की आर्थिक वृद्धि में भी योगदान देते हैं।
भारत के बुलियन आयात के चौंकाने वाले आंकड़े पिछले साल भारत ने घरेलू बचत के लिए 60 अरब डॉलर का सोना और 10-15 अरब डॉलर की चांदी आयात की। ये रकम कुल मिलाकर लगभग 75 अरब डॉलर के करीब पहुंचती है। अंबानी ने इसे स्पष्ट रूप से “अनुत्पादक” बताया क्योंकि ये धातुएं लॉक रहती हैं, कोई ब्याज या लाभांश नहीं देतीं और अर्थव्यवस्था में पूंजी निर्माण नहीं करतीं।
| धातु | पिछले साल का आयात (अरब डॉलर) | मुख्य उपयोग |
|---|---|---|
| सोना | 60 | घरेलू बचत (औद्योगिक नहीं) |
| चांदी | 10-15 | घरेलू बचत (औद्योगिक नहीं) |
शेयर बाजार क्यों बेहतर विकल्प है अंबानी का कहना है कि अगर भारतीय बचतकर्ता कैपिटल मार्केट में सुरक्षित, पारदर्शी और निरंतर तरीके से निवेश करें तो रिटर्न कंपाउंड होंगे। लैरी फिंक ने भी कहा कि अगले 20 साल भारतीय इक्विटी बाजार दोगुना, तिगुना या चौगुना हो सकता है, जबकि सोने में ऐसा नहीं होगा। भारत की 6.4% की अनुमानित वृद्धि (2026) दुनिया की 3.3% से कहीं ज्यादा है, जो इक्विटी के लिए मजबूत आधार देती है।
परिवारों की संपत्ति में फिजिकल एसेट्स का बोलबाला वित्त वर्ष 2025 में भारतीय परिवारों की कुल संपत्ति का करीब 59% सोना-चांदी और रियल एस्टेट में है (वित्त वर्ष 2015 में यह 66% था)। यह आंकड़ा दिखाता है कि वित्तीयकरण अभी भी शुरुआती दौर में है। SIP के जरिए म्यूचुअल फंड में निवेश पिछले कुछ सालों में तीन गुना बढ़कर 2.89 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है, जो सकारात्मक बदलाव की ओर इशारा करता है।
JioBlackRock का मकसद: बचत को निवेश में बदलना रिलायंस और ब्लैकरॉक की साझेदारी से बने जियोब्लैकरॉक एसेट मैनेजमेंट का मुख्य उद्देश्य भारतीयों को बचत से निवेश की ओर ले जाना है। दिसंबर 2025 तक इसके इक्विटी फंड्स में 31.98 अरब रुपये के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट हैं। अंबानी ने कहा कि अगर हम बचतकर्ताओं को समझा सकें कि कैपिटल मार्केट में पैसा कंपाउंड करता है, तो यह न सिर्फ व्यक्तिगत संपत्ति बढ़ाएगा बल्कि देश की ग्रोथ को भी गति देगा।
निवेशकों के लिए व्यावहारिक बातें
सोना-चांदी सुरक्षा तो देते हैं, लेकिन लंबी अवधि में कंपाउंडिंग नहीं।
इक्विटी में SIP से छोटी राशि से भी शुरू कर सकते हैं।
पिछले 20-25 सालों में इक्विटी ने कई मौकों पर सोने को पीछे छोड़ा है, खासकर तेजी वाली अर्थव्यवस्था में।
जोखिम कम करने के लिए विविधीकरण जरूरी है – इक्विटी के साथ थोड़ा सोना भी रखें।
बैंक अकाउंट में पड़ा पैसा भी कंपाउंड नहीं करता, इसे म्यूचुअल फंड या इक्विटी में शिफ्ट करें।
अस्वीकरण: यह लेख समाचार और सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। यह निवेश सलाह नहीं है। बाजार में जोखिम है, निवेश से पहले अपनी जोखिम क्षमता और विशेषज्ञ सलाह लें।






