“केंद्र सरकार ने जहाज निर्माण वित्तीय सहायता नीति (SBFAP) के तहत 288 अनुबंधों को सैद्धांतिक मंजूरी दी है, जिनकी कुल कीमत ₹19,748 करोड़ है और ये 456 जहाजों को कवर करते हैं। अब तक 23 शिपयार्ड्स को 204 जहाजों के लिए ₹620.57 करोड़ की सहायता जारी की जा चुकी है, जबकि योजना का कुल कोष ₹24,736 करोड़ है जिसमें 15-25% तक की वित्तीय मदद मिलेगी। इससे जहाज निर्माण क्षमता बढ़ेगी और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा।”
केंद्र सरकार ने देश को वैश्विक जहाज निर्माण केंद्र बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं। जहाज निर्माण वित्तीय सहायता नीति (Shipbuilding Financial Assistance Policy – SBFAP) के तहत अब तक 288 अनुबंधों को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। इन अनुबंधों की कुल कीमत ₹19,748 करोड़ है और इनके जरिए 456 जहाजों का निर्माण होगा।
यह नीति भारतीय शिपयार्ड्स को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए डिजाइन की गई है। सरकार प्रत्येक जहाज पर श्रेणी के आधार पर 15% से 25% तक की वित्तीय सहायता प्रदान करती है। योजना का कुल कोष ₹24,736 करोड़ है, जो लंबे समय तक घरेलू जहाज निर्माण को बढ़ावा देगा।
अब तक की प्रगति में 23 शिपयार्ड्स को 204 जहाजों के निर्माण और डिलीवरी के लिए ₹620.57 करोड़ की सहायता जारी की जा चुकी है। इन जहाजों में विविध प्रकार शामिल हैं:
टग्स (Tugs)
ऑयल टैंकर (Oil Tankers)
बल्क कैरियर (Bulk Carriers)
कोस्टल रिसर्च वेसल (Coastal Research Vessels)
जनरल कार्गो जहाज
क्रेन पोंटून
हेवी डेक कार्गो जहाज
RO-RO पैक्स जहाज
पैसेंजर कैटामरन
पैसेंजर-कम-मोटरसाइकिल फेरी
लैंडिंग क्राफ्ट
जैक-अप बार्ज
सेल्फ-एलिवेटिंग प्लेटफॉर्म
ये जहाज न केवल व्यावसायिक जरूरतों को पूरा करेंगे बल्कि तटीय व्यापार, अनुसंधान और ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती देंगे।
रोजगार सृजन का बड़ा अवसर
यह पहल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार पैदा करेगी। जहाज निर्माण एक लेबर-इंटेंसिव सेक्टर है, जिसमें स्किल्ड और अर्ध-स्किल्ड दोनों श्रमिकों की जरूरत पड़ती है। प्रमुख लाभार्थी होंगे:
कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (Cochin Shipyard Limited)
गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (Garden Reach Shipbuilders & Engineers)
मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (Mazagon Dock Shipbuilders Limited)
हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (Hindustan Shipyard Limited)
निजी शिपयार्ड्स जैसे लार्सन एंड टुब्रो, पिपावाव डिफेंस, आदि
निर्माण चरण में वेल्डिंग, फेब्रिकेशन, इलेक्ट्रिकल, पेंटिंग और इंजीनियरिंग जैसे कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर भर्तियां होंगी। अनुमान है कि प्रत्येक बड़े जहाज के निर्माण से सैकड़ों प्रत्यक्ष नौकरियां और सप्लाई चेन में हजारों अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होते हैं।
क्षमता विस्तार और वैश्विक लक्ष्य
यह कदम Maritime Amrit Kaal Vision 2047 और Maritime India Vision 2030 का हिस्सा है, जिसके तहत भारत को टॉप-5 ग्लोबल शिपबिल्डर्स में शामिल होने का लक्ष्य है। वर्तमान में भारत का वैश्विक शिपबिल्डिंग में हिस्सा बहुत कम है, लेकिन SBFAP और अन्य योजनाओं से क्षमता को 4.5 मिलियन ग्रॉस टन तक बढ़ाने की योजना है।
अगले दशक में इस नीति से लगभग ₹96,000 करोड़ मूल्य की जहाज निर्माण परियोजनाओं को समर्थन मिलने की संभावना है। इससे निर्यात बढ़ेगा, विदेशी मुद्रा बचेगी और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
शिपयार्ड्स की श्रेणी और सहायता दर
| जहाज श्रेणी | वित्तीय सहायता (%) |
|---|---|
| छोटे और मध्यम जहाज | 25% तक |
| बड़े कमर्शियल जहाज | 20% तक |
| विशेषीकृत/डिफेंस जहाज | 15-20% |
यह सहायता जहाज निर्माण लागत को कम कर भारतीय शिपयार्ड्स को चीन, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों से मुकाबला करने लायक बनाएगी।
केंद्र की यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ को समुद्री क्षेत्र में नई ऊंचाई देगी, जहां जहाज निर्माण न केवल आर्थिक विकास का इंजन बनेगा बल्कि लाखों युवाओं के लिए स्थायी करियर के अवसर भी खोलेगा।
Disclaimer: यह खबर सरकारी घोषणाओं और उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है। निवेश संबंधी निर्णय से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।






