“जीटीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर में LIC और ICICI प्रूडेंशियल जैसे बड़े निवेशकों की मजबूत हिस्सेदारी के बावजूद कंपनी का शेयर ₹1.25 के आसपास कारोबार कर रहा है। टेलीकॉम टावर बिजनेस में 26,000+ टावर होने के कारण आकर्षक लगती कंपनी में तेजी न आने के पीछे भारी कर्ज, लगातार घाटा और रिस्ट्रक्चरिंग की चुनौतियां हैं।”
जीटीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर: LIC और ICICI का निवेश, फिर भी सवा रुपये पर अटका शेयर – कारण क्या हैं?
जीटीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (GTL Infrastructure Ltd) भारत की प्रमुख टेलीकॉम टावर कंपनियों में से एक है, जिसके पास देशभर में 26,000 से अधिक टेलीकॉम टावर हैं। यह कंपनी मुख्य रूप से Reliance Jio, Bharti Airtel और Vodafone Idea जैसी टेलीकॉम कंपनियों को टावर इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराती है। 5G रोलआउट के दौर में टावर बिजनेस की डिमांड बढ़ने की उम्मीद के बावजूद कंपनी का शेयर लंबे समय से ₹1-₹1.50 के बीच फंसा हुआ है, जो इसे एक क्लासिक पेनी स्टॉक बनाता है।
एलआईसी (Life Insurance Corporation of India) और ICICI प्रूडेंशियल जैसी संस्थाओं की हिस्सेदारी कंपनी में महत्वपूर्ण है। ये बड़े निवेशक कंपनी के फंडामेंटल्स और भविष्य की संभावनाओं पर भरोसा दिखाते हैं, लेकिन शेयर प्राइस में कोई खास उछाल नहीं आया है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन बहुत कम रहता है, जबकि एसेट बेस बड़ा है।
कंपनी के कर्ज का बोझ सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। पिछले कई वर्षों से जीटीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर लगातार घाटे में चल रही है। हाल के वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, कंपनी का कुल कर्ज हजारों करोड़ रुपये में है, जो उसके रेवेन्यू और ऑपरेशनल प्रॉफिट से कहीं अधिक है। उच्च इंटरेस्ट कॉस्ट और डेब्ट सर्विसिंग की समस्या ने कंपनी की बैलेंस शीट को कमजोर किया हुआ है।
टेलीकॉम सेक्टर में रिस्ट्रक्चरिंग और कंसोलिडेशन के बाद टावर कंपनियों पर दबाव बढ़ा। Vodafone Idea की वित्तीय स्थिति कमजोर होने से किराया वसूली में देरी हुई, जिसका सीधा असर जीटीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे टावर प्रोवाइडर्स पर पड़ा। कंपनी ने कई बार डेट रिस्ट्रक्चरिंग की कोशिश की, जिसमें बॉन्डहोल्डर्स और लेंडर्स के साथ समझौते शामिल हैं, लेकिन ये प्रयास पूरी तरह सफल नहीं हुए।
हालांकि, कंपनी के पास मजबूत एसेट बेस है। 26,000+ टावरों का नेटवर्क 5G डिप्लॉयमेंट में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। टेलीकॉम ऑपरेटर्स नए टावर लगाने के बजाय मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं, जिससे टेनेंसी रेशियो में सुधार की गुंजाइश है। कंपनी ने हाल के वर्षों में कुछ ऑपरेशनल सुधार किए हैं, जैसे एनर्जी मैनेजमेंट और कॉस्ट रिडक्शन, लेकिन ये अभी प्रॉफिटेबिलिटी में बड़ा बदलाव नहीं ला पाए।
बड़े निवेशकों की मौजूदगी कंपनी में स्थिरता का संकेत देती है। LIC जैसी संस्था लंबी अवधि के निवेशक के रूप में देखती है, जबकि ICICI प्रूडेंशियल भी पोर्टफोलियो में इसे शामिल रखे हुए है। लेकिन रिटेल निवेशकों के लिए यह हाई-रिस्क स्टॉक है, क्योंकि पेनी स्टॉक में वोलेटिलिटी बहुत ज्यादा होती है और कोई भी नेगेटिव न्यूज शेयर को और नीचे धकेल सकती है।
कंपनी की स्थिति को समझने के लिए प्रमुख बिंदु:
टावर संख्या : 26,000+ (देशभर में फैला नेटवर्क)
मुख्य क्लाइंट्स : Reliance Jio, Bharti Airtel, Vodafone Idea
शेयर प्राइस रेंज : लंबे समय से ₹1 से ₹1.50 के बीच
कर्ज स्तर : उच्च (हजारों करोड़ में), इंटरेस्ट कवरेज कमजोर
घाटा : लगातार कई क्वार्टर से नेट लॉस
संभावित ट्रिगर्स : डेट रिस्ट्रक्चरिंग सफलता, टेनेंसी रेट बढ़ना, 5G से रेवेन्यू ग्रोथ
कंपनी के लिए भविष्य की राह चुनौतीपूर्ण है। अगर डेट रिस्ट्रक्चरिंग पूरी होती है और टेलीकॉम सेक्टर में रिकवरी आती है, तो शेयर में मल्टीबैगर रिटर्न की संभावना बन सकती है। लेकिन फिलहाल, उच्च कर्ज और घाटे के कारण तेजी नहीं आ रही। निवेशकों को कंपनी के क्वार्टरली रिजल्ट्स, डेट अपडेट और टावर इंडस्ट्री की ट्रेंड्स पर नजर रखनी चाहिए।
Disclaimer: यह एक न्यूज रिपोर्ट है। इसमें दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है और निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है। कृपया अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।






