केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद स्थिति लगातार बदल रही है। फरवरी में घोषित अंतरिम ट्रेड समझौते में रीबैलेंसिंग का प्रावधान है, जिससे यदि परिस्थितियां बदलीं तो डील को दोबारा संतुलित किया जा सकता है। भारत ‘वेट एंड वॉच’ रुख अपनाए हुए है और अमेरिका के साथ संवाद जारी रखते हुए अपने हितों की रक्षा सुनिश्चित करेगा। ट्रंप प्रशासन द्वारा सेक्शन 122 के तहत 10% टैरिफ लगाया गया है, जो अगले सप्ताह 15% तक बढ़ सकता है, जिससे बातचीत में नई जटिलताएं आ सकती हैं।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील: टैरिफ बदलाव के बीच रीबैलेंसिंग की संभावना
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में न्यूज18 राइजिंग भारत समिट 2026 में कहा कि भारत-अमेरिका के बीच फरवरी की शुरुआत में घोषित अंतरिम ट्रेड समझौते पर नजर बनाए हुए हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के व्यापक टैरिफ को रद्द करने के बाद स्थिति ‘एवॉल्विंग’ यानी लगातार बदलती हुई है। गोयल ने जोर दिया कि संयुक्त वक्तव्य में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि परिस्थितियां बदलती हैं तो समझौते को रीबैलेंस किया जाएगा ताकि दोनों पक्षों के बीच संतुलन बना रहे।
फरवरी के पहले सप्ताह में जारी जॉइंट स्टेटमेंट के अनुसार, अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर रेसिप्रोकल टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करने की बात कही थी। इसके बदले भारत ने अमेरिकी उत्पादों को प्राथमिकता देने और बाजार पहुंच बढ़ाने पर सहमति जताई। इसमें अतिरिक्त 25% पेनल्टी टैरिफ (रूसी तेल खरीद से जुड़े) को हटाने का भी जिक्र था। हालांकि, कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन ने सेक्शन 122 के तहत सभी व्यापारिक साझेदारों पर 10% टैरिफ 150 दिनों के लिए लगाया है, जो अगले सप्ताह 15% तक बढ़ सकता है। गोयल ने कहा कि अमेरिका के पास कई अन्य कानूनी उपकरण हैं, जिनका इस्तेमाल वे कर सकते हैं, इसलिए विभिन्न स्तर पर वार्ताएं चल रही हैं।
भारत का रुख साफ है – देश ‘वेट एंड वॉच’ मोड में है। गोयल ने जोर दिया कि टैरिफ दर से ज्यादा महत्वपूर्ण प्रतिस्पर्धात्मक लाभ है। समझौता लेदर, टेक्सटाइल, डायमंड, फार्मा और स्मार्टफोन जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स के लिए नए दरवाजे खोल सकता है। संवेदनशील क्षेत्र जैसे डेयरी, मक्का, सोयाबीन और पोल्ट्री को पहले से छूट मिली हुई है। गोयल ने आश्वासन दिया कि भारत किसी भी समझौते में जल्दबाजी नहीं करेगा और अपने हितों से समझौता नहीं होगा।
हाल के घटनाक्रमों में अमेरिकी कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक ने दिल्ली में गोयल से मुलाकात की और व्यापारिक साझेदारी पर चर्चा की। यह मुलाकात कोर्ट फैसले के कुछ दिनों बाद हुई, जो संकेत देती है कि दोनों पक्ष संवाद बनाए रखने के इच्छुक हैं। गोयल ने कहा कि भारत प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त हासिल करने के लिए बेहतरीन डील चाहता है।
ट्रेड डील के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
टैरिफ में कमी : भारतीय निर्यात पर 50% से 18% तक संभावित कटौती (अंतरिम समझौते के अनुसार)।
रीबैलेंसिंग क्लॉज : परिस्थितियों में बदलाव पर डील दोबारा संतुलित करने का प्रावधान।
प्रतिस्पर्धात्मक फायदा : एशियाई प्रतिस्पर्धियों से बेहतर स्थिति सुनिश्चित करना।
संवाद की निरंतरता : अमेरिका के साथ सक्रिय बातचीत और आंतरिक विचार-विमर्श जारी।
संभावित चुनौतियां : नए टैरिफ (10-15%) से निर्यात प्रभावित हो सकता है, जिस पर नजर रखी जा रही है।
यह स्थिति भारतीय निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका भारत का प्रमुख बाजार है। गोयल के बयान से साफ है कि भारत लचीला रुख अपनाएगा लेकिन राष्ट्रीय हितों की रक्षा सर्वोपरि रहेगी। आगे की वार्ताओं में टैरिफ अपडेट्स का असर डील की दिशा तय करेगा।
Disclaimer: यह खबर विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है और सूचनात्मक उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।






