“ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद अमेरिका-इज़राइल हमलों और तेहरान की जवाबी कार्रवाई से मिडिल ईस्ट में युद्ध तेज हो गया है। भारतीय शेयर बाजार सोमवार को गैप डाउन ओपनिंग के साथ खुल सकता है, जहां क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल, ग्लोबल रिस्क-ऑफ सेंटिमेंट और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से सेंसेक्स-निफ्टी पर 1-2% तक गिरावट का खतरा है।”
ईरान-इज़राइल युद्ध और भारतीय शेयर बाजार पर असर
ईरान और इज़राइल के बीच चल रहा युद्ध अब पूर्ण स्तर पर पहुंच चुका है। अमेरिका और इज़राइल की संयुक्त कार्रवाई में शनिवार को ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई, जिसकी पुष्टि ईरानी स्टेट मीडिया ने की। इसके बाद ईरान ने जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं, जिसमें इज़राइल के अलावा गल्फ देशों में अमेरिकी बेस पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन अटैक हुए। रविवार को इज़राइल ने तेहरान के दिल में नई लहर के हमले किए, जहां धुएं के गुबार और विस्फोटों की खबरें आ रही हैं। ईरान ने 40 दिनों का शोक घोषित किया है और IRGC ने “इतिहास की सबसे भयानक ऑफेंसिव ऑपरेशन” की धमकी दी है।
यह स्थिति भारतीय शेयर बाजार के लिए गंभीर चुनौती बन गई है। पिछले कारोबारी दिन सेंसेक्स 961 अंक गिरकर 81,287 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 318 अंक लुढ़ककर 25,179 के स्तर पर आ गया। सोमवार को ग्लोबल मार्केट्स में रिस्क-ऑफ मूड के चलते बड़ा गैप डाउन संभव है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर युद्ध और बढ़ा तो बाजार में 1-1.5% की शॉर्ट टर्म करेक्शन आ सकती है, जिसमें निफ्टी 25,000 के सपोर्ट को टेस्ट कर सकता है।
तीन प्रमुख चीजें जिन पर बड़ा असर पड़ने वाला है
क्रूड ऑयल की कीमतें मिडिल ईस्ट में युद्ध से होर्मुज जलडमरूमध्य (जो दुनिया के 20% क्रूड ऑयल का रास्ता है) पर खतरा बढ़ गया है। ब्रेंट क्रूड पहले से ही ऊपर की ओर है और अब और स्पाइक की आशंका है। भारत 85% क्रूड आयात करता है, इसलिए कीमतों में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत का आयात बिल 12-15 बिलियन डॉलर बढ़ सकता है। इससे इन्फ्लेशन बढ़ेगा, RBI की मॉनेटरी पॉलिसी पर दबाव आएगा और रुपये में कमजोरी आएगी। ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs), एविएशन, टायर, पेंट और ऑटो सेक्टर की कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली (FII Selling) ग्लोबल अनिश्चितता से FII इमर्जिंग मार्केट्स से पैसा निकाल रहे हैं। भारत में FII फ्लो पहले से कमजोर हैं और अब युद्ध से रिस्क एवर्शन बढ़ने पर और बिकवाली हो सकती है। पिछले हफ्तों में FII ने भारतीय इक्विटी से अरबों डॉलर निकाले हैं। अगर यह सिलसिला जारी रहा तो मिडकैप और स्मॉलकैप में तेज गिरावट आ सकती है, जबकि लार्जकैप रिलेटिवली बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
सेफ-हेवन एसेट्स की ओर रुख युद्ध से निवेशक गोल्ड, सिल्वर और अमेरिकी डॉलर की ओर भाग रहे हैं। गोल्ड में तेजी से भारतीय निवेशकों के लिए हेजिंग का विकल्प बनेगा, लेकिन इक्विटी से पैसा निकलेगा। IT और एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर (जैसे फार्मा) रिलेटिव सपोर्ट दिखा सकते हैं, क्योंकि डॉलर मजबूत होगा। वहीं, फाइनेंशियल, FMCG और ऑटो सेक्टर में प्रेशर रहेगा।
सेक्टर-वाइज संभावित प्रभाव
नेगेटिव प्रभाव : ऑयल & गैस, एविएशन, ऑटोमोबाइल, फाइनेंशियल सर्विसेज, FMCG (इन्फ्लेशन से मार्जिन दबाव)
पॉजिटिव/रिलेटिव बेहतर : IT, फार्मा, गोल्ड माइनिंग/ज्वेलरी संबंधित स्टॉक्स, डिफेंस (अगर ग्लोबल टेंशन बढ़े)
तकनीकी स्तर नजर रखें निफ्टी के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट 25,000 और 24,600 है। अगर 25,000 टूटा तो और गहराई तक गिरावट संभव। रेजिस्टेंस 25,500-25,800 पर। सेंसेक्स 81,000 के नीचे बंद हुआ तो 79,000-80,000 तक जा सकता है।
यह युद्ध कितने दिन चलेगा, इस पर सबकी नजर है। ट्रंप ने ईरान को “अभूतपूर्व ताकत” से जवाब देने की चेतावनी दी है। अगर एस्केलेशन रुका नहीं तो भारतीय निवेशकों को शॉर्ट टर्म में सतर्क रहना होगा। लॉन्ग टर्म में भारत की मजबूत फंडामेंटल्स बरकरार रहेंगी, लेकिन फिलहाल वोलेटिलिटी हाई रहेगी।
Disclaimer: यह न्यूज रिपोर्ट वर्तमान घटनाक्रम और बाजार विश्लेषण पर आधारित है। निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें।






