“महाराष्ट्र सरकार ने ओला, उबर और रैपिडो जैसी प्रमुख कंपनियों के अस्थायी लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। नियमों का पालन न करने और जरूरी दस्तावेज जमा न करने के कारण यह कार्रवाई हुई है। अब राज्य में बाइक टैक्सी सेवाएं अवैध हो गई हैं, और पेट्रोल वाली बाइकों का इस्तेमाल करने पर ड्राइवर व मालिक दोनों के खिलाफ केस दर्ज होगा। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने विधान परिषद में इसकी घोषणा की है।”
महाराष्ट्र में ओला, उबर, रैपिडो की बाइक टैक्सी पर सख्त कार्रवाई
महाराष्ट्र सरकार ने ऐप-आधारित बाइक टैक्सी सेवाओं पर बड़ा झटका दिया है। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने विधान परिषद में बताया कि ओला, उबर और रैपिडो को ई-बाइक टैक्सी नियमों के तहत दिए गए अस्थायी (प्रोविजनल) लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। ये लाइसेंस पिछले साल सितंबर 2025 के आसपास मुंबई महानगर क्षेत्र में 30 दिनों के लिए जारी किए गए थे, ताकि कंपनियां नियम पूरे करके स्थायी परमिट हासिल कर सकें।
सरकार का कहना है कि कंपनियों ने तय समयसीमा में जरूरी दस्तावेज जमा नहीं किए और ई-बाइक टैक्सी नियम 2024 का उल्लंघन किया। इन नियमों में केंद्र सरकार के मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस का पालन अनिवार्य है। परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया कि दस्तावेज न जमा करने पर अस्थायी लाइसेंस रद्द करना जरूरी था, ताकि सड़कों पर अवैध बाइक टैक्सी न चल सकें।
इस फैसले के बाद अब महाराष्ट्र में ओला, उबर और रैपिडो की बाइक टैक्सी सेवाएं पूरी तरह बंद हो गई हैं। मुंबई, पुणे और अन्य बड़े शहरों में जहां ये सेवाएं लाखों यात्रियों के लिए किफायती और तेज विकल्प थीं, वहां अब यात्रियों को ऑटो, कैब या पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर निर्भर होना पड़ेगा।
क्यों हुई कार्रवाई? मुख्य वजहें
नियमों का उल्लंघन : कंपनियां ई-बाइक टैक्सी पॉलिसी की शर्तों का पालन नहीं कर रही थीं। केवल इलेक्ट्रिक बाइकों की अनुमति थी, लेकिन कई मामलों में पेट्रोल वाली बाइकों का इस्तेमाल पाया गया।
दस्तावेज जमा न करना : 30 दिनों की समयसीमा में आवश्यक कागजात और अनुपालन प्रमाण नहीं दिए गए।
अवैध संचालन : RTO अधिकारियों की शिकायतों पर कार्रवाई हुई। अब तक 130 से ज्यादा बाइक टैक्सी पर जुर्माना लगाया जा चुका है।
सुरक्षा और नियंत्रण : सरकार का उद्देश्य अवैध ऑपरेशन रोकना और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना है। पेट्रोल बाइक चलाने वाले ड्राइवर और मालिक दोनों के खिलाफ FIR दर्ज होगी, साथ ही वाहन जब्त किए जाएंगे।
यात्रियों और ड्राइवरों पर असर
मुंबई जैसे शहर में जहां ट्रैफिक और लोकल ट्रेनों की भीड़ आम बात है, बाइक टैक्सी एक बड़ा राहत विकल्प था। औसतन 5-10 किमी की दूरी के लिए ये सेवाएं 50-100 रुपये में उपलब्ध थीं, जबकि कैब में दोगुना खर्च आता। अब यात्रियों को महंगे विकल्प चुनने पड़ेंगे या ज्यादा समय लगेगा।
दूसरी ओर, हजारों बाइक ड्राइवरों की रोजी-रोटी प्रभावित हुई है। कई ड्राइवरों ने बताया कि वे ई-बाइक में निवेश कर चुके थे, लेकिन अब सेवाएं बंद होने से उनका काम ठप हो गया। सरकार ने चेतावनी दी है कि बिना परमिट के कोई भी बाइक टैक्सी चलाने पर सख्त कार्रवाई होगी।
भविष्य में क्या संभावनाएं?
परिवहन विभाग ने संकेत दिए हैं कि कंपनियां अगर अब भी शर्तें पूरी करें और नए सिरे से आवेदन करें, तो विचार किया जा सकता है। हालांकि फिलहाल कोई नई समयसीमा या प्रक्रिया की जानकारी नहीं दी गई है। राज्य में ई-बाइक टैक्सी को बढ़ावा देने की नीति बनी हुई है, लेकिन केवल नियमों का सख्त पालन करने वाली कंपनियों को ही अनुमति मिलेगी।
यह फैसला अन्य राज्यों के लिए भी संकेत हो सकता है, जहां बाइक टैक्सी सेवाएं तेजी से बढ़ रही हैं। महाराष्ट्र में यह कार्रवाई सड़क परिवहन को व्यवस्थित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
Disclaimer: यह खबर विभिन्न सार्वजनिक रिपोर्ट्स और सरकारी बयानों पर आधारित है। इसमें कोई व्यक्तिगत सलाह या निवेश संबंधी सुझाव नहीं है।






