**_ मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच क्रिसिल इंटेलिजेंस ने भारत की अर्थव्यवस्था पर संभावित जोखिम की चेतावनी दी है। यदि युद्ध लंबा खिंचा तो कच्चे तेल और कमोडिटी कीमतों में उछाल से डाउनसाइड रिस्क बढ़ सकता है, लेकिन मजबूत घरेलू मांग, निजी निवेश और सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च के दम पर FY27 में रियल GDP ग्रोथ 7.1% रहने का अनुमान है, जो FY26 के 7.6% से मॉडरेट होगा। रिटेल महंगाई 4.3% तक पहुंच सकती है। _**
मिडिल ईस्ट युद्ध से भारत की अर्थव्यवस्था पर खतरा? क्रिसिल का बड़ा अनुमान; 7.1% तक रह सकती है GDP ग्रोथ
पश्चिम एशिया में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य संघर्ष भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा चुनौती बन रहा है। क्रिसिल इंटेलिजेंस की ताजा रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यदि यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रहा तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और कमोडिटी बाजार में अस्थिरता से भारत के मैक्रोइकॉनॉमिक आउटलुक पर डाउनसाइड रिस्क बढ़ जाएगा।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है और अपनी कुल जरूरत का 80-85% से अधिक तेल आयात करता है, जिसमें मिडिल ईस्ट क्षेत्र से 40-50% हिस्सा आता है। हाल के दिनों में ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर $90-100 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं, जो युद्ध से पहले के स्तर से काफी ऊपर है। यदि तेल कीमतें $100 प्रति बैरल पर औसतन बनी रहीं तो चालू खाते का घाटा 0.7-0.8% से बढ़कर 1.9-2.2% तक पहुंच सकता है।
क्रिसिल के अनुसार, हर 10% तेल मूल्य वृद्धि से भारत की GDP ग्रोथ में 20-25 आधार अंक की कटौती हो सकती है। यदि संघर्ष से हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ट्रेडिक बाधित हुआ तो सप्लाई चेन में व्यवधान, LNG की कमी और फर्टिलाइजर जैसे सेक्टर्स में लागत बढ़ने से कंपनियों के मार्जिन पर 50 आधार अंक तक दबाव पड़ सकता है। एयरलाइंस, पेंट्स, केमिकल्स और फर्टिलाइजर जैसे क्रूड-लिंक्ड सेक्टर्स सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।
बासमती चावल के निर्यात पर भी असर पड़ सकता है क्योंकि मिडिल ईस्ट भारत का प्रमुख बाजार है और क्षेत्र में अस्थिरता से ट्रेड फ्लो बाधित हो सकता है। साथ ही, रेमिटेंस में कमी और ग्लोबल फाइनेंशियल अनिश्चितता से रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।
फिर भी क्रिसिल का अनुमान आशावादी है। वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में रियल GDP ग्रोथ 7.1% रहने की उम्मीद है, जो पिछले संशोधित अनुमान FY26 के 7.6% से थोड़ी कम लेकिन संभावित स्तर से ऊपर है। यह ग्रोथ मुख्य रूप से मजबूत प्राइवेट कंजम्पशन, प्राइवेट कैपेक्स में रिकवरी और जारी पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेंडिंग से समर्थित होगी।
प्रमुख आर्थिक प्रभाव और आंकड़े
तेल मूल्य प्रभाव : $10 प्रति बैरल की वृद्धि से चालू खाते का घाटा 0.3-0.4% GDP बढ़ सकता है, जो अतिरिक्त $10 बिलियन आयात बिल का अनुमान है।
महंगाई : रिटेल इन्फ्लेशन FY27 में 4.3% तक पहुंच सकती है (FY26 में 2.5% के आसपास)।
मार्जिन दबाव : इंडिया इंक के ओवरऑल मार्जिन में 50 bps की गिरावट संभावित, खासकर क्रूड-डिपेंडेंट इंडस्ट्रीज में।
ग्रोथ रेसिलिएंस : घरेलू डिमांड और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से बाहरी झटकों का सामना करने की क्षमता मजबूत।
यदि संघर्ष 3-6 सप्ताह में कम हो गया और एनर्जी ट्रेड नॉर्मलाइज हो गया तो प्रभाव सीमित रहेगा। लेकिन लंबे समय तक जारी रहने पर ग्रोथ 6.5-6.6% तक गिर सकती है, जैसा कि अन्य एजेंसियां जैसे SBI रिसर्च और ICRA ने चेतावनी दी है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) भी ग्रोथ स्लोडाउन के जोखिम को ज्यादा गंभीर मान रही है, जबकि इंपोर्टेड इन्फ्लेशन का असर कम हो सकता है। नीतिगत दरें स्थिर रखने की संभावना है ताकि ग्रोथ को सपोर्ट मिले।
भारत सरकार और नीति निर्माता रूसी तेल आयात बढ़ाकर और डाइवर्सिफिकेशन से जोखिम कम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मिडिल ईस्ट की अस्थिरता वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ा खतरा बनी हुई है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और रिपोर्ट्स पर आधारित है। निवेश संबंधी कोई सलाह नहीं है।






