टाटा समूह में रतन टाटा के निधन के बाद से लगातार चुनौतियां बनी हुई हैं। टाटा ट्रस्ट्स में ट्रस्टी नियुक्तियों, बोर्ड सीट्स और गवर्नेंस पर फूट पड़ी है, जिसके चलते दो गुट बन गए हैं। नोएल टाटा की अगुवाई वाले पक्ष और मेहली मिस्त्री से जुड़े ट्रस्टी आमने-सामने हैं। सर रतन टाटा ट्रस्ट और अन्य ट्रस्टों में ट्रस्टी रिन्यूअल पर तनाव बढ़ा है, जबकि शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप की 18% हिस्सेदारी और लिस्टिंग की मांग ने स्थिति जटिल कर दी है। सरकार ने भी हस्तक्षेप किया, लेकिन विवाद पूरी तरह थमा नहीं है।
रतन टाटा के जाने के बाद से खत्म नहीं हो रही समूह की मुश्किलें, अब इस ट्रस्ट में शुरू हो सकता है विवाद; कब थमेगा तूफान?
रतन टाटा के निधन के बाद टाटा ग्रुप की सबसे बड़ी चुनौती टाटा ट्रस्ट्स के भीतर गहराते मतभेद बन गए हैं। टाटा ट्रस्ट्स टाटा संस में 66% नियंत्रण रखते हैं, जो पूरे समूह की धुरी है। 2025 में सितंबर से शुरू हुए विवाद ने ट्रस्ट बोर्ड को दो खेमों में बांट दिया—एक तरफ चेयरमैन नोएल टाटा के साथ वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह जैसे ट्रस्टी, दूसरी तरफ मेहली मिस्त्री, प्रमित झावेरी, जहांगीर एचसी जहांगीर और दarius खंबाटा जैसे सदस्य।
मुख्य विवाद टाटा संस बोर्ड में नामांकित डायरेक्टर्स की नियुक्ति और 75 वर्ष की उम्र के बाद उनकी वार्षिक रिन्यूअल पॉलिसी पर केंद्रित रहा। सितंबर 2025 में विजय सिंह की रिन्यूअल पर वोट 3-3 से बंट गया, जहां नोएल टाटा के निर्णायक वोट ने विरोध को खारिज किया। इसी तरह मेहली मिस्त्री की रिन्यूअल भी असफल रही, जिसके बाद उन्होंने नवंबर 2025 में इस्तीफा दे दिया। मेहली ने इस्तीफे में लिखा कि वे विवाद का कारण नहीं बनना चाहते और रतन टाटा की बात दोहराई—“कोई भी संस्था से बड़ा नहीं होता”।
यह विवाद 2016 के सायरस मिस्त्री हटाने की घटना की याद दिलाता है, जब टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच खुली जंग छिड़ गई थी। अब स्थिति फिर बिगड़ने से बचाने के लिए अक्टूबर 2025 में केंद्र सरकार ने दखल दिया। गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से नोएल टाटा, एन चंद्रशेखरन, वेणु श्रीनिवासन और दarius खंबाटा ने मुलाकात की। सरकार ने स्थिरता बहाल करने की सलाह दी ताकि 180 बिलियन डॉलर के समूह पर असर न पड़े।
विवाद की जड़ें गहरी हैं। मेहली मिस्त्री रतन टाटा के करीबी थे और शापूरजी पल्लोनजी परिवार से जुड़े हैं, जो टाटा संस में 18.37% हिस्सेदारी रखते हैं। वे बोर्ड में अधिक पारदर्शिता, निर्णय प्रक्रिया में शामिल होने और शापूरजी पल्लोनजी की मांगों को मजबूती से उठाना चाहते थे। दूसरी ओर नोएल टाटा का पक्ष लंबे समय तक चलने वाली परोपकारी नीतियों और नियंत्रण बनाए रखने पर जोर देता है।
हाल में टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट (TEDT) में भी तनाव दिखा, जहां वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह की ट्रस्टीशिप रिन्यूअल पर मेहली मिस्त्री ने विरोध जताया। इसी तरह सर रतन टाटा ट्रस्ट में नोएल टाटा के बेटे नेविल टाटा और पूर्व टाइटन एमडी भास्कर भट्ट की नियुक्ति पर वेणु श्रीनिवासन ने आपत्ति लगाई, जिससे नया विवाद शुरू हो सकता है।
ट्रस्ट्स की आंतरिक कलह टाटा संस के फैसलों को प्रभावित कर रही है। शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप टाटा संस की लिस्टिंग की मांग कर रहा है ताकि उनकी हिस्सेदारी से तरलता मिले, लेकिन ट्रस्ट्स इससे हिचक रहे हैं क्योंकि इससे उनका नियंत्रण कमजोर पड़ सकता है और शॉर्ट-टर्म मार्केट प्रेशर बढ़ेगा। आरबीआई के स्केल-बेस्ड रेगुलेशन के तहत लिस्टिंग की समयसीमा भी 2025 में मिस हो चुकी है।
समूह की कुल मार्केट कैप लगभग 368 बिलियन डॉलर है, जिसमें 26 लिस्टेड कंपनियां शामिल हैं। टाटा मोटर्स, टीसीएस, एयर इंडिया और जगुआर लैंड रोवर जैसे ब्रांड्स पर यह अस्थिरता असर डाल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि रतन टाटा की मजबूत व्यक्तिगत साख ने पहले ऐसे विवादों को दबा रखा था, लेकिन अब संस्थागत गवर्नेंस की कमी उजागर हो रही है।
महाराष्ट्र सरकार ने 2025 में पब्लिक ट्रस्ट्स (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस लाया, जिसमें लाइफटाइम ट्रस्टी की संख्या कुल बोर्ड का एक-चौथाई से ज्यादा नहीं हो सकती। यह बदलाव भी विवाद को बढ़ावा दे सकता है।
टाटा ग्रुप की चुनौतियां सिर्फ आंतरिक नहीं हैं। रतन टाटा के जाने के बाद एक साल में समूह को बाजार में करीब 7.18 लाख करोड़ रुपये का नुकसान बताया गया है, हालांकि यह आंकड़ा विवादास्पद है। फिर भी, स्थिरता की कमी निवेशकों और कर्मचारियों में चिंता पैदा कर रही है।
ट्रस्ट्स अब सर रतन टाटा ट्रस्ट के लिए फॉर्मल ट्रस्ट डीड बनाने पर विचार कर रहे हैं ताकि गवर्नेंस नियम स्पष्ट हों और भविष्य में ऐसे विवाद कम हों। लेकिन फिलहाल तूफान थमने के संकेत कम हैं। नोएल टाटा की अगुवाई में समूह अपनी परंपराओं को बचाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ट्रस्टी स्तर पर एकता बहाल होना जरूरी है।
Disclaimer: यह खबर उपलब्ध जानकारी और रिपोर्ट्स पर आधारित है। यह निवेश सलाह नहीं है।






