**” अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापक टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया है। इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ अब अवैध हैं, जिससे भारत सहित कई देशों के निर्यात पर पहले लगे उच्च दरों में राहत मिल सकती है। ट्रंप ने तुरंत 10% ग्लोबल टैरिफ लागू किया है, लेकिन भारत के लिए यह पहले के 18% से कम हो सकता है।” **
ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका, अमेरिकी राष्ट्रपति का टैरिफ गैरकानूनी; भारत पर क्या पड़ेगा सीधा असर?
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी 2026 को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के आधार पर लगाए गए व्यापक टैरिफ को गैरकानूनी घोषित कर दिया। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स की अगुवाई वाली बहुमत राय में कहा गया कि यह कानून राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं देता, क्योंकि टैरिफ लगाना कांग्रेस का विशेषाधिकार है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि IEEPA केवल आपात स्थिति में आयात को विनियमित करने की अनुमति देता है, न कि कर लगाने या राजस्व जुटाने की।
यह फैसला 6-3 के बहुमत से आया, जिसमें चीफ जस्टिस रॉबर्ट्स के साथ जस्टिस गोरसच, बैरेट और तीन लिबरल जस्टिस शामिल थे। डिसेंटिंग ओपिनियन में जस्टिस थॉमस, कवनॉ और अलिटो ने राष्ट्रपति की शक्तियों का समर्थन किया। कोर्ट ने केस को लोअर कोर्ट में रिफंड और अन्य मुद्दों के लिए वापस भेज दिया है। अनुमान है कि IEEPA के तहत अब तक 130 से 160 बिलियन डॉलर से अधिक टैरिफ इकट्ठा किए गए थे, जो अब अवैध माने जा रहे हैं।
ट्रंप प्रशासन ने फैसले के तुरंत बाद प्रतिक्रिया देते हुए 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत नया 10% ग्लोबल टैरिफ लागू कर दिया है, जो अस्थायी रूप से सभी आयातों पर प्रभावी होगा। यह टैरिफ 150 दिनों तक चल सकता है और पहले के रेसिप्रोकल टैरिफ की जगह लेगा। ट्रंप ने फैसले को “डिसग्रेस” करार देते हुए कहा कि वे अन्य कानूनी रास्तों से टैरिफ जारी रखेंगे।
भारत पर सीधा असर देखें तो पहले IEEPA के तहत रेसिप्रोकल टैरिफ 25-50% तक पहुंच गया था, लेकिन हालिया भारत-अमेरिका ट्रेड फ्रेमवर्क डील के बाद इसे 18% पर लाया गया था। यह डील रूसी तेल खरीद रोकने और अन्य मुद्दों पर आधारित थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से 18% टैरिफ का कानूनी आधार खत्म हो गया है। व्हाइट हाउस अधिकारियों के अनुसार, अब भारत पर अस्थायी रूप से केवल 10% ग्लोबल टैरिफ लागू होगा। इससे पहले MFN स्टेटस के तहत भारत का औसत टैरिफ करीब 3.5% था, लेकिन नए 10% के साथ कुल प्रभावी दर 13.5% तक पहुंच सकती है, जो पहले के 18% से कम है।
भारतीय निर्यातकों के लिए प्रमुख लाभ वाले क्षेत्र:
टेक्सटाइल और गारमेंट्स: पहले उच्च टैरिफ से प्रभावित, अब कम दर से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
फार्मास्यूटिकल्स: जेनेरिक दवाओं का निर्यात सस्ता हो सकता है।
प्रेशियस स्टोन्स और ज्वेलरी: अमेरिका प्रमुख बाजार, टैरिफ राहत से निर्यात बढ़ने की उम्मीद।
ऑटो पार्ट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स: सप्लाई चेन में सुधार संभव।
ट्रंप ने दावा किया कि भारत के साथ डील से अमेरिका फायदे में है और भारत अब टैरिफ चुकाएगा। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला वैश्विक व्यापार में स्थिरता ला सकता है, क्योंकि उच्च टैरिफ से पहले मुद्रास्फीति और कीमतें बढ़ी थीं। भारत सरकार ने फैसले पर नजर रखने की बात कही है और आगे की ट्रेड नेगोशिएशन में इसका इस्तेमाल कर सकती है।
रिफंड का मुद्दा अनसुलझा है। इंपोर्टर्स रिफंड के लिए मुकदमे दायर कर रहे हैं, लेकिन प्रक्रिया लंबी चलेगी। अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि टैरिफ से इकट्ठा राजस्व अब प्रभावित होगा।
ट्रंप के टैरिफ एजेंडे पर यह बड़ा झटका है, लेकिन प्रशासन अन्य सेक्शन जैसे 232 (नेशनल सिक्योरिटी) और 301 (अनफेयर ट्रेड) का इस्तेमाल कर सकता है। भारत के लिए यह अल्पकालिक राहत है, लेकिन लंबे समय में ट्रेड डील की मजबूती जरूरी होगी।
Disclaimer: यह न्यूज रिपोर्ट वर्तमान घटनाक्रमों पर आधारित है।






